बंगाल में आरपार की लड़ाई, ऋतब्रत को नेता प्रतिपक्ष बनाने पर TMC खटखटाएगी कोर्ट का दरवाजा, कल्याण बनर्जी ने बताया बैठक में क्या-क्या फैसले हुए

West Bengal News: कोलकाता में ममता बनर्जी के घर हुई TMC बैठक के बाद सांसद कल्याण बनर्जी ने स्पीकर द्वारा नियुक्त विपक्ष के नेता पद को गैर-कानूनी बताया। पार्टी सोमवार को हाईकोर्ट में याचिका दायर करेगी।

 
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ऋतब्रत को नेता प्रतिपक्ष बनाने पर कोर्ट जाएगी TMC | Image: ANI

West Bengal News: तृणमूल कांग्रेस (TMC) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास पर हुई उच्च-स्तरीय बैठक खत्म हो गई है। बैठक के बाद पार्टी सांसद कल्याण बनर्जी ने एक तीखा बयान दिया है। उन्होंने स्पीकर द्वारा नियुक्त किए गए विपक्ष के नेता के पद को पूरी तरह गैर-कानूनी बताया और इसके खिलाफ सोमवार को कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर करने की घोषणा की।

बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में कल्याण बनर्जी ने कहा, “हमने तय किया है कि स्पीकर की ओर से नियुक्त विपक्ष के नेता का पद गैर-कानूनी है। हम इसके खिलाफ सोमवार को कोर्ट जाएंगे। हम हाई कोर्ट में याचिका दायर करेंगे।”

उन्होंने आगे आरोप लगाते हुए कहा, "BJP जिस तरह से TMC कार्यकर्ताओं की हत्या कर रही है और उन पर झूठे केस दर्ज कर रही है, हम उसके खिलाफ लड़ेंगे। हम सड़कों पर भी लड़ेंगे और कोर्ट में भी।"

June 5, 2026

8 विधायक और 6 सांसद आज पार्टी की बैठक के लिए TMC अध्यक्ष ममता बनर्जी के आवास पहुंचे।

विधायक

  1. बीना मंडल
  2. आशिमा पात्रा
  3. मदन मित्रा
  4. कुणाल घोष
  5. फिरहाद हकीम
  6. शोभनदेब चट्टोपाध्याय
  7. बिमान बनर्जी
  8. अशोक कुमार देब

सांसद

  1. डोला सेन
  2. माला रॉय
  3. कल्याण बनर्जी
  4. अभिषेक बनर्जी
  5. डेरेक ओ'ब्रायन
  6. सुदीप बंद्योपाध्याय

TMC में बगावत

2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में TMC को भारी हार का सामना करना पड़ा। BJP ने बहुमत हासिल कर सरकार बनाई। TMC के कई विधायक हार गए और पार्टी में असंतोष बढ़ गया। हार के बाद TMC में नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया। ममता बनर्जी गुट ने शोभनदेव चट्टोपाध्याय को LoP नियुक्त करने का प्रस्ताव स्पीकर को भेजा, जिसमें अभिषेक बनर्जी समेत अन्य नेताओं के हस्ताक्षर थे।

बागी विधायकों ने आरोप लगाया कि इन हस्ताक्षरों में जालसाजी हुई है। ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा जैसे विधायकों ने शिकायत करते हुए कहा कि उनके हस्ताक्षर बिना सहमति के लगाए गए। इस मामले में CID जांच शुरू हुई और अभिषेक बनर्जी के खिलाफ FIR दर्ज हुई।

स्पीकर का फैसला और TMC का विभाजन

विधानसभा स्पीकर ने ममता गुट के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इसके बजाय ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट (लगभग 58-60 विधायकों का दावा) को मुख्य विपक्षी दल के रूप में मान्यता दे दी। स्पीकर ने ऋतब्रत बनर्जी को LoP नियुक्त किया। कुल 80 TMC विधायकों में से करीब 58 से 60 विधायक ऋतब्रत बनर्जी के समर्थन में है।

यह TMC के 28 साल के इतिहास में पहला बड़ा विभाजन माना जा रहा है। बागी गुट ने दावा किया कि उनके पास दो-तिहाई बहुमत है और उन्होंने पार्टी संविधान के अनुसार कदम उठाए।

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Published By : Sagar Singh

पब्लिश्ड 5 June 2026 at 20:31 IST