'53 सालों से कांग्रेस में हूं', CM बनते ही DK शिवकुमार को पहला झटका, रामलिंगा रेड्डी ने दिया मंत्री पद से इस्तीफा, वादाखिलाफी का लगाया आरोप
Karnataka Congress: डीके शिवकुमार सरकार को बड़ा झटका लगा है। पोर्टफोलियो बंटवारे के बाद वरिष्ठ कांग्रेस नेता रामलिंगा रेड्डी ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। वे मनचाहा विभाग न मिलने से नाराज हैं।
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Karnataka Ramalinga Reddy Resigns: कर्नाटक में शपथ ग्रहण के 72 घंटे बाद ही डीके शिवकुमार की सरकार संकट में घिर आई है। मंत्रिमंडल गठन के बाद बड़ा घमासान शुरू हो गया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता रामलिंगा रेड्डी विभागों के बंटवारे से नाराज हो गए और उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। रेड्डी ने वादाखिलाफी का आरोप लगाया।
डीके शिवकुमार 3 जून को सीएम पद की शपथ ली है। इसके बाद गुरुवार (4 जून) को नई सरकार में विभागों का बंटवारा किया गया। इस दौरान रामलिंगा रेड्डी को जल संसाधन विभाग (वाटर रिसोर्सेज) का जिम्मा सौंपा गया। वे बेंगलुरु विकास विभाग ने मिलने से खफा हो गए।
मैं अभी भी कांग्रेस में हूं- रेड्डी
मंत्री पद से इस्तीफे पर रामलिंगा रेड्डी ने साफ किया कि मैं अभी भी कांग्रेस पार्टी में हूं। मैंने पार्टी से इस्तीफा नहीं दिया है। मैं पिछले 53 सालों से कांग्रेस पार्टी में हूं। मैंने पार्टी में कई जिम्मेदारियां निभाई हैं। मैंने पूर्व मुख्यमंत्री एम. वीरप्पा मोइली और एस.एम. कृष्णा समेत कई मुख्यमंत्रियों की कैबिनेट में मंत्री के तौर पर काम किया है। मैंने कभी किसी से मंत्री पद नहीं मांगा।
सूत्रों के मिली जानकारी के अनुसार, विभागों के बंटवारे को लेकर गुरुवार (5 जून) को एक बैठक हुई, जिसमें अपनी नाराजगी जताते हुए रेड्डी बीच में ही बाहर चले गए थे। इस दौरान उन्होंने सीएम डीके शिवकुमार को साल 2023 में किया गया वादा भी याद दिलाया, जिसमें उन्हें कथित तौर पर भविष्य में कैबिनेट फेरबदल होने पर उन्हें बेंगलुरु विकास विभाग देने की बात कही गई थी।
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'शिवकुमार ने खुद दिया था बार-बार भरोसा'
प्रेस कॉन्फ्रेंस में रामलिंगा रेड्डी ने कहा कि डीके शिवकुमार मेरे घर आए थे और उन्होंने कहा था कि जब मैं मुख्यमंत्री बनूंगा, तो इस मंत्रालय (बेंगलुरु विकास) को छोड़ दूंगा। आप इसे संभाल लेना। रेड्डी ने बताया कि शिवकुमार ने शपथ ग्रहण से एक दिन पहले भी आश्वस्त किया था कि ये पोर्टफोलिया उन्हें ही मिलेगा। मैंने कभी इस विभाग की मांग खुद नहीं की, लेकिन बार-बार मुझे भरोसा दिया गया। इसके बाद अब मुझे जल संसाधन विभाग दे दिया गया है। इस फैसले से मैं बेहद निराश हूं और इसीलिए इस्तीफा दे रहा हूं।